मसूरी। ब्रिटिश काल में भारत के सर्वेयर जनरल रहे सर जॉर्ज एवरेस्ट का 236वां जन्म दिन सर जार्ज एवरेस्ट हाउस में पूरे उत्साह के साथ रजस एअरो स्पोर्टस एंड एडवेंचर्स एंव पर्यटन विभाग ने संयुक्त रूप से उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर मनाया। इस मौके पर स्कूली बच्चों के साथ केक काटा गया व उन्हें उपहार दिए गये।
सर जार्ज एवरेस्ट जिनके नाम से दुनिया की सबसे उंची चोटी का नाम पड़ा ऐसे महान भूगोलवेत्ता थे जिनके प्रयास से भारत का भूगोल लिखा गया। उन्होंने पहाड़ों की रानी मसूरी में रहकर इस इतिहास को रचा। इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि इतिहासकार गोपाल भारद्वाज, एअरो स्पोर्टस के केशव, अजय दुबे व मसूरी पर्यटन विभाग के अधिकारी हीरा लाल ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उनको श्रद्धांजलि दी। वहीं राजकीय प्राथमिक विद्यालय के नन्हें बच्चों ने उनके जन्म दिवस पर केक काटा व उन्हें रजस एअरो स्पोर्टस की ओर से उपहार दिए गये। इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि गोपाल भारद्वाज ने बताया कि सर जार्ज एवरेस्ट मसूरी में करीब 12 वर्ष रहे। उनके कार्य को देखकर विश्व की सबसे उंची चोटी सर्गमाथा या पीक 15 का नाम एवरेस्ट के नाम पर रखा गया। उन्होंने भारत ही नहीं एशिया के भूगोल के लिए किया जो उस समय असंभव था उनके इस कार्य के लिए रायल ज्योगरिफिकल सोसाइटी इंग्लैंड ने उनके नाम से एवरेस्ट चोटी का नाम रखने का प्रस्ताव किया। उन्होंने पूरे भारत का सर्वें किया उनकी एक बड़ी टीम थी जो सर्वे करते थे व मसूरी आकर टेबल कार्य करते थे। सर जार्ज एवरेस्ट के बाद सर्वे जनरल एड्रयू स्काट वॉ बने जो तत्कालीन मसूरी नगर पालिका के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने जार्ज एवरेस्ट के नाम से विश्व की सबसे उंची चोटी का नाम उनके नाम पर रखा। उन्होंने बताया कि ने एवरेस्ट 16 साल की उम्र में भारत आ गये थे। वह तीन साल रहे व उसके बाद स्वास्थ्य लाभ के लिए इंग्लैड चले गये व 1830 में भारत लौटे व 1843 तक यहां रहे। उन्होंने अपनी प्रयोगशाला मसूरी में स्थापित कर देश-दुनिया की कई ऊंची चोटियों की खोज कर उनको मानचित्र में स्थान दिया। उन्होंने कहा कि महान सर्वेयर राधानाथ सिकधर भी उनकी टीम में थे जो गणित के विद्वान थे जिन्हें कंपयूटर की उपाधि दी गयी। उन्होंने कहा कि लोग कहते है कि अंग्रेजो ने भारत पर रूल किया व भारत को खोखला किया लेकिन कुछ कार्य उन्होंने ऐसे किए जो याद रखे जाने लायक थे। मसूरी उनकी कर्म स्थली रही। इस मौके पर सर जार्ज एवरेस्ट स्थित रजस एअरो स्पोर्टस के केशव ने सभी का आभार व्यक्त किया व कहा कि सर जार्ज एवरेस्ट ऐसे महान भूगोलवेत्ता थे जिन्होंने भारत ही नहीं एशिया का सर्वे तब किया जब कोई आधुनिक उपकरण नहीं होते थे। उन्होंने बताया उनके हाउस में म्युजियम बनाया गया है जिसमें उनके उपकरणों सहित पूरा इतिहास रखा गया है। ताकि आने वाली पीढी उनके बारे में जान सके। इस मौके पर पर्यटन अधकारी हीरा लाल, केशव, अजय दुबे, स्कूली बच्चे व पर्यटक मौजूद रहे।
