रेलवे व भूमिधरों के विवाद में संयुक्त सीमंाकन कराये जाने के बाद भी पिलर नहीं लगाने पर आक्रोश।

उत्तराखंड देहरादून/मसूरी

मसूरी। झड़ीपानी स्थित रेलवे व खातेदारों की भूमिधरी को लेकर विवाद लंबे समय से चल रहा था उसमें याचिकाकर्ता आसू झडीपानी निवासी के के प्राथना पत्र पर, दिए गये निर्देशों के अनुपालन में सीनियर सेक्शन इंजीनियर उत्तर रेलवे पत्र के बाद रेलवे भूमि का संयुक्त सीमांकन कराये जाने को लेकर एसडीएम सदर के निर्देश पर दस दिनों में पिलर लगाये जाने थे लेकिन अभी तक दस दिन बीत जाने के बाद भी पिलर नहीं लगाये गये।
इस मामले में ज्वाइंट मजिस्टेªट के नेतृत्व में बनाई गयी संयुक्त समिति ने राजस्व अभिलेख एवं 1940 के बंदोबस्त अधिकारी के आदेशानुसार सजरा मानचित्र का स्थल पर पैमाईश एवं मिलान करने पर भू अभिलेखागार व राजस्व उप निरीक्षक क्यारकुली के कार्यालय में भूचित्रों में ग्राम झडीपानी में भूमिधरों एवं रेल विभाग के मध्य की रेखा को आधार बिंदु मानते हुए सजरा मानचित्र पर पैमाइश की गयी, जिसके अनुसार रेल विभाग के पास 930बीघा 11बिस्वाके सापेक्ष में 941 बीघा 11 बिस्वा अर्थात 10.86बीघा भूमि अधिक पायी गयी। तथा विवादित गांववालों की भूमि पर जिस पर रेल विभाग अपनी भूमि होने की दावेदारी काफी समय से करता आया है वह भूमि बंदोबस्त 1940 के सजरे की निर्धारित सीमा के अनुसार रेल विभाग की भूमि नहीं पायी गयी। आख्या के अनुरूप पक्षकारों के स्वयं के खर्चे पर स्थाई चिन्ह पिलर स्थापित कर गूगल कार्डिनेट के साथ स्थल के छायाचित्र सहित संपूर्ण कार्यवाही 10 दिनों में करनी थी लेकिन दस दिन बीत जाने पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गयी। इस संबंध में एसडीएम मसूरी राहुल आनंद ने कहा कि जो जांच आख्या की गयी उस पर रेलवे ने आपत्ति दर्ज की है, जिस पर रेलवे एक सप्ताह का समय दिया गया है।