मसूरी। पर्यटन नगरी में वीक एंड होने व ईद का अवकाश होने पर बड़ी संख्या में पर्यटकों ने मसूरी का रूख किया ताकि वे यहां के प्राकृतिक सौदर्य का आनंद ले सकें, लेकिन बार बार एक ही समस्या जाम की आ जाती है जिससे निजात पाना कठिन ही नही ंनामुमकिन हो गया है, इसके पीछे किसकी कमी है यह तय कर पाना कठिन हो रहा है। हर विभाग एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ने की बात करता है। लेकिन इसका समाधान कैसे हो इस पर किसी का ध्यान नहीं है जबकि इसके लिए दीर्घ कालिक योजना बनायी जानी चाहिए।
ईद के साथ वीक एंड आने पर बड़ी संख्या में पर्यटकों ने मसूरी का रूख किया लेकिन हर बार की तरह इस बार भी पर्यटकों को जाम से जूझने को मजबूर होना पड़ा। सबसे अधिक जाम की समस्या लंढौर क्षेत्र में रही जहां पर मलिगांर चौक से लेकर लंढौर बाजार तक जाम लगे रहने के कारण लोगों को घंटो परेशान होना पड़ा। वहीं इसी के साथ ही गांधी चौक, मालरोड पर भी जाम लगता रहा। वहीं शिव मंदिर का जाम भी भीड़ बढने के बाद बढ जाता है व वाहनों की लंबी कतारे लग जाती है। लेकिन जाम की बात हर बार होती है, सीजन की बैठकें भी होती है, लेकिन जाम से निजात दिलाने पर कोई ठोस कार्यवाही न होती है न इस दिशा में प्रयास किया जाता है कि इसका स्थाई समाधान कैसे किया जाय। जाम लगने से पर्यटकों का मसूरी आने पर जो खुशी मिलती है वह निराशा में बदल जाती है व लोगों का अधिकतर समय जाम में चला जाता है। अब तो हाल यह है कि जो पर्यटक किसी तरह से मसूरी अपने वाहन से जाम को झेलते हुए पहुंचता है वह उसके बाद घूमने के लिए अपना वाहन ले जाने से कतराता है व उन्हें मजबूरी में स्कूटी से पर्यटक स्थलों पर घूमने जाने को मजबूर होना पड़ता है जिससे उनका बजट भी खराब हो जाता है। बार बार जाम लगने की समस्या का समाधान करने के लिए दीर्घ कालीन योजना पर विचार किया जाना चाहिए व जब तक यह न हो तो तत्कालिक व्यवस्था बनायी जानी चाहिए ताकि लोगों को परेशान होने से बचाया जा सके। जाम लगने पर हर बार पुलिस की कमी को मुख्य दोषी माना जाता है लेकिन जब पुलिस की नफरी ही पर्याप्त नहीं है तो पुलिस भी क्या करेगी या तो पुलिस बल बढाया जाना चाहिए या अन्य उपाय करने चाहिए ताकि जाम न लगे। अब तो मालरोड पर भी वाहनों की संख्या बढने से मालरोड पर भी जाम लगने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।
