ऋषिकेश में सालाना 4.5 लाख पर्यटकों से 300 करोड़ का राफ्टिंग कारोबार, अब ₹100 Cr से हो रहे ये काम

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ऋषिकेश में ₹100 करोड़ के राफ्टिंग प्रोजेक्ट पर चल रहा काम, 4.5 लाख पर्यटक, 265 ऑपरेटर और 300 करोड़ की इकोनॉमी. रिपोर्ट- धीरज सजवाण.

देहरादून: ऋषिकेश में गंगा की लहरों में राफ्टिंग से लेकर पर्यटकों की सुविधाओं को नए सिरे से व्यवस्थित करने के लिए 100 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, लेकिन अब आने वाले समय में यह सिर्फ राफ्टिंग बुकिंग और नदी तक पहुंचने की सुविधा तक सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि सुरक्षा, पार्किंग, राफ्ट स्टोरेज, ट्रैफिक, गाइड ट्रेनिंग और पूरे कारोबार को एक व्यवस्था में लाने की कोशिश है. ताजा स्थिति रिपोर्ट बताती है कि प्रोजेक्ट के कई हिस्सों पर काम शुरू हो गया है.

100 करोड़ का प्रोजेक्ट, लेकिन जमीन पर कितनी रफ्तार? ऋषिकेश को रिवर राफ्टिंग और एडवेंचर टूरिज्म के बड़े केंद्र के तौर पर विकसित किया जा रहा है. जिसके तहत ‘आइकॉनिक सिटी प्रोजेक्ट’ के तहत रिवर राफ्टिंग डेवलपमेंट के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है. जून 2026 की विभागीय रिपोर्ट में इस प्रोजेक्ट को दो चरणों में बांटा गया था.

फेज 1 और फेज 2 में क्या-क्या काम होंगे? फेज 1 की लागत 44.04 करोड़ रुपए और फेज 2 की लागत 56 करोड़ रुपए रखी गई है. फेज 1 में जानकी सेतु पर एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र (ICCC) भवन और शिवपुरी में फैसिलिटी सेंटर शामिल है. जबकि, फेज 2 में शिवपुरी में राफ्ट स्टोरेज वेयरहाउस, पार्किंग और नीम बीच पर पार्किंग व अन्य सुविधाएं विकसित की जानी हैं.

राफ्टिंग से जुड़े रास्तों का भी होना है विकास: इसके अलावा राफ्टिंग से जुड़े रास्तों के लिए अलग से करीब 26.85 करोड़ रुपए का रोड डेवलपमेंट फेज 1 भी प्रस्तावित है. इस पूरे काम को ‘आइकॉनिक सिटी प्रोजेक्ट’ की बड़ी योजना से जोड़कर देखा जाए, तो तस्वीर और बड़ी हो जाती है.

करीब 4,698 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट प्रस्तावित: विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक ‘आइकॉनिक सिटी प्रोजेक्ट‘ के तहत कुल करीब 4,698 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं. इनमें करीब 3,436 करोड़ रुपए इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) और 1,262 करोड़ रुपए पीपीपी यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के प्रोजेक्ट शामिल हैं.

करीब 2,776 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार बताई गई है. जबकि, करीब 660 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार की जा रही थी. इस पूरी योजना में ट्रिवेणी घाट विकास, आस्था पथ, पार्किंग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, शहर की निगरानी के लिए आईसीसीसी, नए अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (ISBT) और चारधाम रजिस्ट्रेशन सेंटर, रोड री-मॉडलिंग, रिवरफ्रंट और राफ्टिंग डेवलपमेंट जैसे काम शामिल हैं.

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जानकी सेतु पर पांच मंजिला ICCC भवन तो शिवपुरी में बन रहा फैसिलिटी सेंटर: राफ्टिंग प्रोजेक्ट के फेज 1 में जानकी सेतु के पास 5 मंजिला आईसीसीसी बिल्डिंग बन रही है. जून की रिपोर्ट में इसका फिजिकल वर्क प्रोग्रेस 25 फीसदी था. उस समय लोअर ग्राउंड फ्लोर की स्लैब कास्टिंग पूरी हो गई थी और फर्स्ट फ्लोर के कॉलम का काम करीब 60 फीसदी तक हो चुका था.

आईसीसीसी बिल्डिंग का कितना हुआ काम? वहीं, सितंबर की ताजा प्रगति रिपोर्ट में आईसीसीसी बिल्डिंग की प्रगति 30 फीसदी दिखाई गई है. इसका टेंडर लगभग 31.64 करोड़ रुपए का है. काम 11 अगस्त 2025 को शुरू हुआ था और इसके पूरा होने की तारीख 10 अगस्त 2026 रखी गई थी, लेकिन 11 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, काम अभी भी चालू है.

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फिलहाल, फर्स्ट फ्लोर की स्लैब कास्टिंग का काम चल रहा है और पीछे की आरसीसी रिटेनिंग वॉल पूरी बन चुकी है, तो वहीं शिवपुरी फैसिलिटी सेंटर का हिस्सा लगभग 4.746 करोड़ रुपए का है. जून में इसकी प्रगति सिर्फ 1 फीसदी थी और सितंबर की रिपोर्ट में भी यह 1 फीसदी ही है. हालांकि, सितंबर में साइट पर काम शुरू होने की बात कही गई है.

नीम बीच फैसिलिटी सेंटर का बजट करीब 8.36 करोड़ रुपए: दूसरी तरफ नीम बीच फैसिलिटी सेंटर का अनुमानित बजट करीब 8.36 करोड़ रुपए है, लेकिन सितंबर तक इसका टेंडर भी पब्लिश नहीं हुआ था. मतलब साफ है कि 100 करोड़ रुपए के इस पूरे प्रोजेक्ट के सभी हिस्से एक जैसी स्पीड से आगे नहीं बढ़ रहे हैं.

इसके अलावा फेज 2 की मंजूरी लागत 56 करोड़ रुपए है, जिसका टेंडर करीब 45.61 करोड़ रुपए का है. इसका काम 25 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था और पूरा करने की तिथि 24 अगस्त 2027 तय की गई है. इसमें शिवपुरी में राफ्ट स्टोरेज वेयर हाउस की प्रगति सितंबर में 5 फीसदी थी और लगभग 30 फीसदी फाउंडेशन वर्क पूरा होने की बात बताई गई.

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शिवपुरी पार्किंग और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की प्रगति 8 फीसदी दर्ज हुई है, जिसमें 90 मीटर की रिटेनिंग वॉल ग्राउंड लेवल तक बनकर तैयार है. नीम बीच पर तीन स्टैक पार्किंग और एक G+1 पार्किंग की प्रगति फिलहाल 0 फीसदी है. हालांकि, वहां सर्वे और साइट लेआउट मार्किंग का काम चल रहा है. इसके अलावा बस पार्किंग और कैफेटेरिया की प्रगति 7 फीसदी तक पहुंच गई है.

‘आइकॉनिक सिटी प्रोजेक्ट’ के तहत चल रहे कामों की स्थिति-

सिर्फ राफ्टिंग नहीं, पूरा सिस्टम बदलने की तैयारी: उत्तराखंड के पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल ने बताया कि आइकॉनिक सिटी के तहत राफ्टिंग को सिर्फ एक एडवेंचर एक्टिविटी की तरह नहीं देखा जा रहा. बल्कि, इसके आसपास पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है. उनका कहना है कि,

“ऋषिकेश आने वाले पर्यटकों के रजिस्ट्रेशन के लिए सिंगल विंडो सिस्टम का प्रावधान किया गया है. इसके साथ ही राफ्ट बुकिंग, राफ्ट स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन और दूसरी जरूरी सहूलियतों को एक प्रॉपर स्ट्रक्चर में लाने की प्लानिंग है. यानी अभी अलग-अलग जगहों और अलग-अलग सेटअप्स में चल रहे काम को एक इंटीग्रेटेड सिस्टम में लाने की कोशिश हो रही है.“
– धीराज गर्ब्याल, सचिव पर्यटन उत्तराखंड –

ऋषिकेश में इस समय करीब 8 से 9 राफ्टिंग यूनियन और एसोसिएशन काम कर रहे हैं. पर्यटन सचिव के मुताबिक, शासन और जिला प्रशासन, जिसमें टिहरी जिला प्रशासन भी शामिल है. जो इन यूनियन के साथ बातचीत कर रहा है. ताकि, सभी को एक अम्ब्रेला एसोसिएशन के भीतर लाया जा सके. इसका मकसद पर्यटकों को ज्यादा सुव्यवस्थित सुविधा देना और पूरे बिजनेस के लिए एक जैसा सिस्टम तैयार करना है.

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राफ्टिंग ऑपरेटरों के लिए तैयार किया रहा बायलॉज: वहीं, राफ्टिंग समिति के संरक्षक प्रदीप राज सिंह भी अब 265 ऑपरेटरों को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की बात कह रहे हैं. उनके मुताबिक, पिछले 5 से 7 महीनों से इसके लिए ट्रायल्स चल रहे थे और अब 265 ऑपरेटरों को एक अंब्रेला के नीचे लाने की दिशा में काम हुआ है. संगठन का करीब 38 पेज का बायलॉज भी तैयार किया जा रहा है.

पहले क्या था बड़ा कन्फ्यूजन? उनका कहना है कि पहले ऑपरेटरों के बीच असुरक्षित कम्पटीशन की वजह से राफ्टिंग के रेट्स काफी डाउन चले गए थे. इसका सीधा असर बिजनेसमैन की कमाई और फिर इक्विपमेंट, ट्रेनिंग और सेफ्टी पर होने वाले इन्वेस्टमेंट पर पड़ता था. सरकार और राफ्टिंग ऑपरेटरों के बीच पहले इस बात को लेकर भी कन्फ्यूजन था कि नई व्यवस्था में उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (UIIDB) पूरी राफ्टिंग इंडस्ट्री का ऑपरेशन किसी प्राइवेट वेंडर को सौंप देगा और लोकल ऑपरेटर सिर्फ ड्राइवर बनकर रह जाएंगे.

“पर्यटन सचिव और यूआईआईडीबी (UIIDB) के साथ हुई बैठक के बाद यह स्थिति साफ हुई है कि प्रोजेक्ट को ऑपरेटरों के लिए एक संभावनाओं की तरह देखा जा रहा है. यूआईआईडीबी सचिव और उनकी टीम अगले 10 से 15 दिनों में राफ्टिंग इंडस्ट्री के ऑपरेटरों के साथ एक बड़ी मीटिंग करने वाली है, जिसमें प्रोजेक्ट, अरेंजमेंट्स और ऑपरेटरों के विषयों पर विचार विमर्श होगा.“
– प्रदीप राज सिंह, संरक्षक, राफ्टिंग समिति –

यहां एक और बड़ा विषय रोड और ट्रैफिक का भी है. राफ्टिंग से जुड़े रास्तों के लिए अलग से रोड प्रोजेक्ट्स रखे गए हैं. जून की प्रेजेंटेशन में नीम बीच रोड के लिए 6.70 करोड़ रुपए, शिवपुरी रोड के लिए 3.60 करोड़ रुपए का बजट बताया गया है. इसके अलावा आरसीसी (RCC) रोड के लिए 16.55 करोड़ रुपए का बजट बताया गया था. सितंबर तक नीम बीच रोड का टेंडर फ्लोट हो चुका था और शिवपुरी रोड का टेंडर अवॉर्ड होकर जारी हो चुका था. शिवपुरी रोड का टेंडर लगभग 5.14 करोड़ रुपए का बताया गया है.

“ऋषिकेश-चारधाम रूट पर लगने वाले जाम के लिए सिर्फ केवल राफ्टिंग वाहनों पर दोष नहीं दिया जा सकता. इसी रूट से चारधाम यात्री, लोकल लोग और दूसरे पर्यटक भी यात्रा करते हैं. कुल ट्रैफिक में राफ्टिंग वाहनों की संख्या केवल 10 से 20 फीसदी ही है. आने वाले समय में नए बाईपास, हाईवे और टनल बनने से ऊपरी इलाकों की तरफ जाने वाले ट्रैफिक को रिलीफ मिलेगा.“
– प्रदीप राज सिंह, संरक्षक, राफ्टिंग समिति –

ऋषिकेश राफ्टिंग इंडस्ट्री का डेटा-

सुरक्षा पर फोकस, 50 साल से 60 साल हुई गाइड की उम्र सीमा: राफ्टिंग के विस्तार के साथ सेफ्टी एक सबसे बड़ा विषय है. पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के मुताबिक, नई राफ्टिंग नियमावली में सेफ्टी स्टैंडर्ड्स पर स्पेशल ध्यान दिया गया है. पुरानी व्यवस्था में 50 साल की उम्र के बाद किसी व्यक्ति के राफ्टिंग गाइड के रूप में काम करने पर बैन था. अब इसे बढ़ाकर 60 साल कर दिया गया है, लेकिन इसके लिए गाइड का फिजिकली फिट होना जरूरी है.

सरकार का लॉजिक है कि उत्तराखंड में राफ्टिंग की शुरुआती जनरेशन के कई गाइड अब 50 साल के आसपास पहुंच चुके हैं. पर्यटन सचिव के मुताबिक, इनमें से कई लोगों ने 1995-96 के दौर से राफ्टिंग का बेस मजबूत करने में काम किया है. उनके पास लंबा एक्सपीरियंस है, लेकिन सरकारी जॉब या पेंशन जैसी फैसिलिटी नहीं है. उम्र की सीमा बढ़ने से उन्हें अपना एक्सपीरियंस इस्तेमाल करने और आपना काम बनाए रखने का मौका मिलेगा.

सेफ्टी के मामले में सीपीआर यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) और फर्स्ट एड ट्रेनिंग को भी नियमों से जोड़ा जा रहा है. सचिव के मुताबिक, किसी एक्सीडेंट, सीरियस इंजरी या रेस्क्यू की स्थिति में गाइड को तुरंत फर्स्ट एड और सीपीआर देने में काबिल होना चाहिए. इसके लिए गाइड्स को इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स के अकॉर्डिंग ट्रेनिंग दी जा रही है.

उनका कहना है कि उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां रिवर गाइड्स को इस लेवल की सीपीआर (CPR) और फर्स्ट एड ट्रेनिंग दी जा रही है. ऋषिकेश रीजन में करीब 700 से 800 गाइड्स बताए गए हैं. इनमें से करीब 50 फीसदी को पिछले राफ्टिंग सीजन में ट्रेनिंग दी जा चुकी है. बाकी गाइड्स को भी ट्रेनिंग दी जाएगी. यह प्लान सिर्फ राफ्टिंग गाइड्स तक ही लिमिटेड नहीं रहने वाला है.

विंटर सीजन में ट्रेकिंग रूट्स पर काम करने वालों के लिए सीपीआर एवं फर्स्ट एड ट्रेनिंग अनिवार्य: पर्यटन विभाग आने वाले विंटर सीजन में ट्रेकिंग रूट्स पर काम करने वाले टूर ऑपरेटर्स और बेसिक व एडवांस्ड कोर्सेज कर चुके गाइड्स के लिए भी सीपीआर एवं फर्स्ट एड ट्रेनिंग को अनिवार्य करने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए ट्रेनिंग को देहरादून तक सीमित रखने के बजाय संबंधित जिले में ले जाने का प्लान है.

उत्तरकाशी के गाइड्स को उत्तरकाशी में, चमोली के गाइड्स को चमोली में और रुद्रप्रयाग से लेकर पिथौरागढ़ तक के गाइड्स को उनके जिले में ही ट्रेनिंग देने की व्यवस्था की जाएगी. इससे ट्रेनिंग लेने के लिए गाइड्स को दूर नहीं जाना पड़ेगा और लोकल लेवल पर प्रशिक्षित मैनपावर तैयार हो सकेगी. राफ्टिंग के इंफ्रास्ट्रक्चर में सेफ्टी को लेकर एक और अहम हिस्सा प्रस्तावित आईसीसीसी है.

आईसीसीसी फॉर सिटी सर्विलांस के प्रस्तावित सुविधाएं: आइकॉनिक सिटी की अलग स्कीम में करीब 121.55 करोड़ रुपए के आईसीसीसी फॉर सिटी सर्विलांस का प्रावधान है. इसमें ट्रैफिक सर्विलांस, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन, रेड-लाइट वायलेशन डिटेक्शन, डायनामिक मैसेज सिस्टम, ओवर-स्पीड डिटेक्शन और स्मार्ट पार्किंग जैसी सुविधाएं प्रस्तावित हैं.

विभागीय प्रेजेंटेशन में इसका कवरेज ऋषिकेश के साथ मुनिकी रेती, तपोवन और स्वर्गाश्रम तक बताया गया है. यानी आने वाले समय में राफ्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सिर्फ रिवर बैंक पर बनी बिल्डिंग्स से ही नहीं, बल्कि रजिस्ट्रेशन, बुकिंग, ट्रांसपोर्ट, पार्किंग, ट्रैफिक मॉनिटरिंग और इमरजेंसी रिस्पॉन्स जैसे सिस्टम्स से कनेक्ट करने की कोशिश है.

रिवर राफ्टिंग सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति-

ऋषिकेश की अर्थव्यवस्था में राफ्टिंग का कितना हिस्सा? राफ्टिंग समिति के संरक्षक प्रदीप राज सिंह के मुताबिक, ऋषिकेश में कमर्शियल राफ्टिंग का इतिहास 40 साल से भी ज्यादा पुरानी है. पिछले 10 से 15 सालों में इस बिजनेस में काफी ग्रोथ हुई है. उनका कहना है कि,

“वर्तमान करीब 265 रजिस्टर्ड ऑपरेटर्स हैं और इनके पास 500 से ज्यादा राफ्ट्स हैं. इन राफ्ट्स को चलाने के लिए करीब 500 गाड़ियां, करीब 500 ड्राइवर्स और 500 से ज्यादा गाइड्स जुड़े हैं. होटल, रेस्टोरेंट, टी स्टॉल्स और दूसरे छोटे बिजनेसेस को जोड़ें तो 10 हजार से ज्यादा लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष इस इंडस्ट्री पर निर्भर हैं.“
– प्रदीप राज सिंह, संरक्षक, राफ्टिंग समिति –

राफ्टिंग का क्रेज और 300 करोड़ की टूरिज्म इकोनॉमी: वहीं, पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल की मानें तो राफ्टिंग से 300 करोड़ रुपए का बिजनेस होता है. उनके मुताबिक,

“ऋषिकेश में करीब 260 रजिस्टर्ड फर्म्स हैं और हर साल लगभग 4.5 लाख टूरिस्ट्स राफ्टिंग के लिए आते हैं. कौड़ियाला से ऋषिकेश तक गंगा के करीब 36 किलोमीटर के स्ट्रैच में सालाना 200 से 300 करोड़ रुपए का बिजनेस होता है.“
– धीराज गर्ब्याल, सचिव पर्यटन उत्तराखंड –

यानी राफ्टिंग का असर सिर्फ रिवर एक्टिविटी तक लिमिटेड नहीं है. वीकेंड्स पर जब ऋषिकेश में पर्यटकों की भीड़ बढ़ती है, तो होटल्स, टैक्सी, रेस्टोरेंट्स, ढाबे और दूसरे लोकल बिजनेस भी इससे कनेक्टेड रहते हैं. यही वजह है कि सरकार अब राफ्टिंग को सिर्फ एडवेंचर एक्टिविटी के बजाय टूरिज्म इकोनॉमी के एक बड़े पार्ट की तरह देख रही है. शिवपुरी, कौड़ियाला, मुनिकीरेती और दूसरे राफ्टिंग स्टार्टिंग प्वाइंट्स तक पहुंचने वाले रूट्स एवं इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने की प्लानिंग इसी सोच का हिस्सा है.

प्रोजेक्ट में लेट-लतीफी और जमीनी चुनौतियां: हालांकि, प्रोजेक्ट का असली असर तभी दिखेगा, जब प्रस्तावित सुविधाएं धरातल पर पूरी तरह से नजर आएंगी. फिलहाल, विभागीय प्रगति रिपोर्ट बताती है कि कई काम अभी कंस्ट्रक्शन के शुरुआती स्टेज में ही हैं. आईसीसीसी बिल्डिंग की वास्तविक डेडलाइन निकल चुकी है. नीम बीच फैसिलिटी सेंटर का टेंडर अभी पेंडिंग है. नीम बीच की स्टैक पार्किंग पर कंस्ट्रक्शन शुरू नहीं हुआ है और कई दूसरे कंपोनेंट्स सिंगल-डिजिट फिजिकल प्रोग्रेस पर अटके हैं.

दूसरी तरफ फेज 2 की कंप्लीशन डेट यानी निर्माण पूरा करने की आखिरी तिथि अगस्त 2027 रखी गई है. इसलिए उसके लिए अभी समय बचा हुआ है. इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक बड़ा चैलेंज जमीन और साइट क्लीयरेंस भी रहा है. विभागीय रिपोर्ट में ओल्ड बारात घर को हटाने, दुकानों की प्रोटेक्शन, एक्सकैवेशन में पानी भरने, सीवर व ड्रेनेज लीकेज और कंस्ट्रक्शन व्हीकल मूवमेंट को देरी का कारण बताया गया है.

शिवपुरी साइट पर अतिक्रमण वाले कैंप की वजह से साइट क्लीयरेंस में देरी और स्थानीय जरूरतों के मुताबिक घाट लेआउट में बदलाव की बात का भी जिक्र है. साथ ही जून की पर्यावरण स्थिति रिपोर्ट (PMC) में कंस्ट्रक्शन क्वालिटी और डॉक्यूमेंटेशन से जुड़े कई टेक्निकल ऑब्जर्वेशन भी नोट किए गए थे.

इनमें साइट डॉक्यूमेंटेशन की कमी, लेबोरेटरी और टेस्टिंग अरेंजमेंट्स की कमी, कंक्रीट कॉम्पेक्शन, शटरिंग सपोर्ट, रीइन्फोर्समेंट डेवलपमेंट लेंथ, रस्टेड स्टील (जंग लगा स्टील) और पर्याप्त तकनीकी मैनपावर की कमी से जुड़े ऑब्जर्वेशन शामिल थे. इन ऑब्जर्वेशन पर प्रोजेक्ट अथॉरिटी की तरफ से क्या एक्शन लिया गया, ये भी इस प्रोजेक्ट के मॉनिटरिंग सिस्टम में एक बड़ा सवाल है.

कुल मिलाकर ऋषिकेश में राफ्टिंग को लेकर पिक्चर अब सिर्फ इतनी नहीं है कि हर साल लाखों पर्यटक गंगा में राफ्टिंग करने आते हैं. एक तरफ सरकार 100 करोड़ रुपए के रिवर राफ्टिंग डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के जरिए बुकिंग, स्टोरेज, पार्किंग, फैसिलिटी सेंटर और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर को उचित प्रबंधन करने की कोशिश कर रही है.

दूसरी तरफ राफ्टिंग इंडस्ट्री खुद 265 ऑपरेटर्स को एक प्लेटफॉर्म पर लाने, बिजनेस को सिस्टमैटिक करने और सरकार के साथ मिलकर आगे का सेटअप तय करने के दिशा में बढ़ रही है. सुरक्षा के लिए गाइड ट्रेनिंग और उम्र सीमा में बदलाव किए गए हैं. जबकि, सिटी के व्यापक आइकॉनिक सिटी प्लान में ट्रैफिक सर्विलांस, पार्किंग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और रिवरफ्रंट डेवलपमेंट जैसे काम भी कनेक्टेड हैं.