163 दिनों से धरने पर बैठे रेहड़ी-पटरी श्रमिकों को कांग्रेस का समर्थन। 

उत्तराखण्ड देहरादून/मसूरी
मसूरी। रेहड़ी-पटरी लगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले लगभग 80 गरीब परिवार पिछले 163 दिनों से शहीद स्मारक, मसूरी में धरने पर बैठे हैं। इन श्रमिकों की मांग है कि उन्हें रेहड़ी-पटरी लगाकर अपना छोटा व्यवसाय करने और सम्मानपूर्वक अपने परिवार का पालन-पोषण करने का अवसर दिया जाए।
रेहड़ी-पटरी श्रमिकों का कहना है कि नगर पालिका मसूरी द्वारा उन्हें माल रोड से हटाए जाने के बाद उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उनका आरोप है कि इस संबंध में उन्होंने कई बार नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती मीरा सकलानी एवं क्षेत्रीय विधायक तथा कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी से वार्ता कर अपनी समस्या के समाधान की मांग की, लेकिन उन्हें कोई सकारात्मक आश्वासन नहीं मिला। श्रमिकों का यह भी आरोप है कि कई अवसरों पर उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया। लगातार 163 दिनों से समाधान नहीं होने के कारण श्रमिकों ने भूख हड़ताल शुरू करने का निर्णय लिया था। इसी क्रम में आज प्रदेश कांग्रेस कमेटी की उपाध्यक्ष श्रीमती सुजाता पॉल एवं कांग्रेस प्रवक्ता एवं अधिवक्ता पंकज सिंह क्षेत्री शहीद स्मारक, मसूरी पहुंचे और धरनारत श्रमिकों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। कांग्रेस नेताओं ने श्रमिकों के आंदोलन को समर्थन देते हुए उनसे भूख हड़ताल टालने का आग्रह किया तथा महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन के रास्ते पर आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति से उसकी रोजी-रोटी का साधन छीनना उसके परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा कर देता है। प्रशासन एवं नगर पालिका को चाहिए कि गरीब श्रमिकों की आजीविका और शहर की व्यवस्था दोनों के बीच संतुलन बनाते हुए व्यवहारिक एवं मानवीय समाधान निकाला जाए।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लगभग 80 परिवारों की आजीविका का प्रश्न केवल प्रशासनिक कार्रवाई का विषय नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और रोजगार के अधिकार से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने प्रशासन एवं नगर पालिका से मांग की कि श्रमिक प्रतिनिधियों के साथ तत्काल बैठक कर उनकी समस्याओं का समाधान निकाला जाए और उन्हें ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए जिससे वे सम्मानपूर्वक अपना व्यवसाय कर सकें। सुजाता पॉल एवं अधिवक्ता पंकज सिंह क्षेत्री ने स्पष्ट किया कि गरीब रेहड़ी-पटरी श्रमिकों की आवाज को लोकतांत्रिक एवं गांधीवादी तरीके से मजबूती से उठाया जाएगा और उनके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय न हो, इसके लिए हर संभव संवैधानिक प्रयास किया जाएगा।