मसूरी के पेड़ो, खनन, अवैध निर्माण से बचाने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। 

उत्तराखण्ड देहरादून/मसूरी

मसूरी। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता रवीद्र जुगराण ने मसूरी में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने गत ढाई महीने मसूरी के हर क्षेत्र में जाकर मसूरी का धरातल पर जाकर भ्रमण व मौका मुआइना किया। इस दौरान अपनी आंखो से देखा कि जिस तरह से यहंा पर वनों का कटान, पहाड़ांे का कटान, खनन हो रहा है व कंक्रीट के जंगल खडे हो रहे है, उससे मसूरी की भार क्षमता लगभग समाप्त हो चुकी है, वहीं कोई भी राजनैतिक, सामाजिक संगठन, जागरूक नागरिक मसूरी की संवेदनशीलता पर कुछ नहीं बोल रहा वहीं एमडीडीए, वन विभाग, खनन विभाग, राजस्व विभाग, पर्यावरण से जुड़े विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा होना स्वाभाविक है। उससे लगता है कि सभी विभागों ने आंखे बंद कर रखी हैं। अगर संबंधित विभाग व नागरिक जागरूक होते तो मसूरी का इतना नुकसान नहीं होता।
लाइब्रेरी क्षेत्र में एक होटल के प्रांगण में पत्रकारों से बातचीत में भाजपा के प्रदेष प्रवक्ता रवींद्र जुगराण ने कहा कि अगर सभी जागरूक होते तो मसूरी का यह हाल नहीं होता। ब्रिेटिश काल में मसूरी का वहीं स्थान था जो कोलकाता व दिल्ली का था व इसे पहाडों की रानी मसूरी का दर्जा दिया गया। मसूरी देश व दुनिया मे जाने जाना वाला प्रमुख शहर है। कोल्हूखेत के 15 किमी हवाई दूरी के अंदर पेड़ो, पहाड़ों का कटान, खनन व चारागाह की भूमि खुर्दबुर्द हो रही है अवैध निर्माण की बाढ सी आ गयी है। जिसकी शिकायत प्रदेश के अपर मुख्य सचिव को की उन्हांेने शिकायत का संज्ञान लिया व वन संरक्षक गढवाल को जांच के निर्देश दिए, लेकिन जो जांच रिपोर्ट आयी वह सत्यता से परे है ऐसा वन संरक्षक गढवाल धीरज पांडे ने कहा। उन्होंने दुबारा पूरी जांच के आदेश दिए व कहा कि लीपापोती बर्दास्त नहीं होगी। वहीं उन्हांेने जार्ज एवरेस्ट के मामले में भी शिकायत की उसका भी पर्यटन सचिव ने संज्ञान लिया वहीं पुरूकुल मसूरी रोपवे के टावर का बेस कमजोर है जिसके बारे में भी शिकायत की व इसका दुबारा स्थल निरीक्षण की बात की। अगर मसूरी में इसी तरह अवैध निर्माण, वनो का कटान, खनन होता रहा तो मसूरी का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा। उन्होंने नेपाल की बाढ का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां बडी संख्या में जनहानि हुई है। जबकि मसूरी में दस वर्ष पहले सर्वे की संपत्ति पर राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर का हिमनद संस्था के गठन का निर्णय लिया गया था जो पूरे उत्तराखंड के ग्लेशियरों पर नजर रखता, व पांच सौ पचास करोड स्वीकृत हुए थे व पचास करोड वाडिया इंस्टीटयूट को दिया था लेकिन उन्होंने भारत सरकार को गलत जानकारी दी जिस पर यह मामला ठंडे बस्ते में पड़ गया। जिस पर उन्होंने सांसद हरिद्वार व पौडी को इसकी जानकारी दी व इस संबंध में कार्रवाई करने को कहा। जबकि मसूरी भूकंप की दृष्टि से अति संवेदनशील क्षेत्र में है, वहीं मसूरी में कई पुराने भवन है जो जीर्णशीर्ण है, दिल्ली की घटना ताजा उदाहरण है जिस पर मसूरी के सभी संगठनों सहित पालिका, व संबंधित विभागों, प्रशासन को यह नहीं दिख रहा है कि मसूरी में अवैध निर्माणों की बाढ आ गयी है। छोटे मकानों का नक्शा पास नहीं हो रहा व बडे निर्माण हो रहे है इसकी भी शिकायत शीघ्र की जायेगी। जबकि मसूरी के चारो ओर पहाड दरक रहे है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा रहा तो मसूरी में पर्यटन को बडा नुकसान होगा। यह सामूहिक जिम्मेदारी का कार्य है किसी एक का नहीं है। लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी यहां है जहां देश भर के नौकरशाह बन रहे है उनके सामने मसूरी तबाह हो रही है, ये देश को चला रहे है, लेकिन उनकी व उनके संस्थान की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह भी सरकार को चेताये अपनी जबावदेही व दायित्वों का निर्वहन करे। उन्होंने यह भी कहाकि मसूरी में जनसंख्या का दबाव बढ रहा है ऐसे में मसूरी के आस पास के क्षेत्रों को आबाद करें व ईको फ्र्रेंडली आवास बनाये।कक्रीट का ढाचा न बनाकर फाइबर का प्रयोग हो मसूरी की भार क्षमता समाप्त हो चुकी है। इसमें नगर पालिका व अकादमी राज्य सरकार को सुझाव दे सकती है। इसमें केवल मसूरी नहीं बल्कि नैनीताल, रानीखेत लैंसडाउन आदि भी शामिल है। उन्होंने मसूरी एमपीजी कालेज के प्रांतीयकरण पर सवाल खडे किए व कहा कि अभी तक जो यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे थे उन्हें हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय की डिग्री मिलती थी जो वैश्विक है लेकिन प्रांतीयकरण करने के बाद इसे श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय में शामिल किया जायेगा जिसे राज्य के बाहर कोई नहीं जानता। उसका अभी तक ढांचा भी नहीं बन पाया, यह गडबडियों का खजाना है, जबकि यहा ंपर रोजगार परक विषय खोले जाने का प्रयास होना चाहिए था। पालिका इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करे। सरकार किसी की भी हो सिस्टम में कमी आयी है, एमपीजी कालेज हास्टल भूमि में पेड़ काटे गये इसका जिम्मेदार कौन है ऐसे में कालेज संपत्ति की जमीन खुर्दबुर्द होने की संभावना बढ गयी है। उन्होंने कहा कि आगामी समय में चुनाव होने है ऐसे में जितने भी दावे दार है किसी भी पार्टी के हो, उन्हंे पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण, पेडो के कटान, खनन,अवैध निर्माण पर अपना पक्ष रखना चाहिए। इस मौके पर डा. दीपक जोशी, सुनील रतूड़ी, गंभीर पंवार, नरेंद्र बिष्ट, शूरवीर भंडारी, रवीद्र गुसांई, नीरज अग्रवाल आदि मौजूद रहे।