पानीवाला बैंड पुश्ता ढहने व नंदा की चौकी सहित पुलों के ढहने की उच्चस्तरीय जांच की मांग।

उत्तराखण्ड देहरादून/मसूरी

 

मसूरी। उत्ततराखण्ड राज्य निर्माण सम्मान आन्दोलनकारी प्रदीप भंडारी ने एसडीएम कार्यालय के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर मसूरी देहरादून मार्ग पानी वाला बैंड में पुश्ता ढहने व नंदा की चौकी पुल प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है व दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया कि देहरादून मसूरी स्टेट हाईवे पर पानी वाला बैंड नामक स्थान पर गत वर्ष 15- 16 सितम्बर की आपदा में मुख्य सडक का पुश्ता टूट गया था। प्राप्त जानकारी के अनुसार क्षतिग्रस्त पुश्ते का गत अक्टूबर- नवम्बर माह में लोक निर्माण विभाग द्वारा ठेकेदार के माध्यम से पुर्ननिर्माण किया था। मगर पुश्ता मात्र 6 महीनें में 20 जुलाई 2026 को भरभराकर दूट गया जिससे रोड बंद हो गया। फिलहाल यहाँ पर पहाड़ी काटकर वनवे के रूप में बहुत कठिनाई एवं जोखिम उठाकर वाहनों का आवागमन हो रहा है। मगर तेज वारिश से यह पहाडी कभी भी दरक सकती है। इस घटना को लगभग अब एक माह होने को है और तब से अब तक उक्त स्थल पर आवागमन बहुत प्रभावित है। कई किमी. तक दोनों तरफ वाहनों की लम्बी लाइनें लग रहती हैं। जिस कारण देश विदेश के पर्यटक व स्थानीय नागरिकों को आवागमन में भारी परेशानी हो रही है तथा एम्बूलेंस आदि आवश्यक सेवायें भी बुरी तरह प्रभावित हैं। मसूरी के लिए एक मात्र सुरक्षित इस मार्ग के भी बंद होने से समझा जा सकता है कि किसी आपात स्थिति के उत्पन्न होने पर क्या दशा होगी। यह मार्ग न  सिर्फ प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल मसूरी का मुख्य मार्ग है बल्कि यह चारधाम के प्रथम पड़ाव गंगोत्री यमनोत्री धाम का मार्ग भी है और देहरादून के अलावा उत्तरकाशी तथा टिहरी जिलों को भी जोड़ता है। ज्ञापन में कहा गया कि मसूरी या प्रदेश भर में बन रहे पुल या पुश्तों के निर्माण में निरन्तर विभागीय लापरवाही, गुणवत्ता का भारी अकाल, सक्षम ठेकेदार का अभाव, उचित देखरेख की कमी तथा उचित तकनीकि प्रणाली का अभाव मुख्य कारण माना जा रहा है। जिस कारण न सिर्फ सड़के टूटती हैं व यातायात प्रभावित होता है बल्कि यात्रियों की सुरक्षा से खेल होता है। जबकि औपचारिकता भर बने लगाए जा रहे राजकोष का भी लाखों करोड़ो रूपया बर्बद हो रहा है। ऐसे दोषपूर्ण परिपाटी पर पूर्णतः एवं स्थाई रोक लगनी चाहिए और जॉच कर सभी दोषियों को सजा मिलनी चाहिए ताकि आगे कोई ऐसा कुकृत्य करने का दुःसाहस न कर सके और कही ंपर भी सड़कों की गुणवता से खिलवाड़ न हो। पुश्ते के ढहने की नन्दा की चौकी पुल प्रकरण की भाँति उच्च स्तरीय जॉच करवाने की मांग करता है। ज्ञापन में  मांग की गयी कि उक्त पुश्ते के किसी भी भाग के निर्माण या मरम्मत पर कुल कितना व्यय आया,  किस मद में से उक्त क्षतिग्रस्त पुश्ते पर पैंसा खर्च हुआ, जिस ठेकेदार द्वारा उक्त पुश्ते का निर्माण किया गया था क्या उसका टेण्डर हुआ था और ठेकेदार के पास वर्क आर्डर था, पुश्ते की मरम्मत हो जाने के बाद किस इंजीनियर ने पुश्ते की जांच कर पास किया था, जब यह पुश्ता गत 15- 16 की आपदा से या उससे पहले से भी खतरा बना हुआ था तो लोकनिर्माण विभाग द्वारा पुश्ते की निगरानी एवं निर्माण समय रहते हुए क्यों नहीं किया गया, तथा पानी के निकासी की उचित व्यवस्था क्यों नहीं की गई, इसके लिए कौन जिम्मेदार है, आदि की जानकारी देने की भी मांग की गयी है।