चीन ने सिर्फ 20 व्यापारियों को दी व्यापार करने की अनुमति, आर्थिक नुकसान की सताने लगी चिंता

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पिथौरागढ़ से जुड़ा लिपुलेख दर्रा छह साल बाद भारत चीन सीमा व्यापार के लिए खुला है. सिर्फ 20 व्यापारियों को व्यापार की अनुमति मिली है.

पिथौरागढ़ (उत्तराखंड): भारत चीन सीमा पर व्यापार को लेकर लगातार विवाद होते जा रहे हैं एक बार फिर छह साल बाद शुरू हो रहे भारत-चीन सीमा व्यापार से स्थानीय व्यापारियों को काफी उम्मीदें थीं. चीन की ओर से केवल 20 व्यापारियों को तकलाकोट मंडी जाने की अनुमति मिलने से अधिकांश व्यापारियों को निराशा होने के साथ ही परेशान भी हैं. चीन से व्यापार के लिए ट्रेड पास बनवा चुके 62 में से 42 व्यापारी फिलहाल व्यापार नहीं कर सकेंगे. चीन सीमा व्यापार शुरू होने की उम्मीद में व्यापारियों ने करीब एक माह पहले ही गूंजी में गुड़, मिश्री और अन्य सामान पहुंचा दिया था.

कुछ दिन पूर्व में ही चीन की ओर से मिले संदेश में स्पष्ट किया गया कि फिलहाल केवल उन्हीं 20 व्यापारियों को तकलाकोट मंडी आने कीअनुमति दी जाएगी, जिनका पहले से वहां सामान रखा हुआ है.इसके बाद प्रशासन और भारत-चीन व्यापार समिति ने संबंधित व्यापारियों की सूची चीन को भेज दी. भारत-चीन व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन सिंह रॉकली ने कहा कि यदि अन्य व्यापारियों को भी जल्द अनुमति नहीं मिली तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा. उन्होंने बताया कि गूंजी में रखा गुड़, मिश्री और अन्य सामान बारिश के कारण खराब होने लगा है.

भारतीय व्यापारियों का पहला दल तकलाकोट पहुंचने के बाद ही वहां की वास्तविक स्थिति और आगे की प्रक्रिया स्पष्ट हो सकेगी. उसके बाद जरूरी कदम उठाए जाएंगे.
-आशीष जोशी,उप जिलाधिकारी धारचूला पिथौरागढ़-

ऐसे में सभी व्यापारियों को व्यापार की अनुमति दिलाना जरूरी है. भारत-चीन व्यापार समिति के अनुसार, अनुमति प्राप्त 20 व्यापारियों का पहला दल एक अगस्त को तकलाकोट के लिए रवाना होगा. हालांकि, चीन की ओर से उन्हें फिलहाल किसी भी प्रकार का सामान साथ ले जाने की अनुमति नहीं दी गई है. ऐसे में व्यापारियों के तकलाकोट पहुंचने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आगे व्यापार किस प्रकार संचालित होगा और चीन का रुख क्या रहता है इस पर सभी व्यापारियों की नजर बनी हुई है.

गौर हो कि लिपुलेख से शुरू होने वाला यह व्यापार स्थानीय व्यापारियों के लिए काफी अहम होता है. यह व्यापार केवल वस्तुओं के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है. ये व्यापार सीमांत क्षेत्रों के विकास का अहम माध्यम भी है. व्यापार से स्थानीय युवाओं को रोजगार व पर्यटन को बढ़ावा मिलता है. साथ ही क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी तेज मिलती है. बताते चलें कि अतीत से ही लिपुलेख दर्रे से भारत और तिब्बत के बीच पारंपरिक व्यापार होता रहा है. लेकिन 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद इसका असर देखने को मिला.

जिसका असर दोनों देशों के व्यापारियों पर पड़ा.भारत-चीन युद्ध के बाद व्यापार बंद हो गया था. साल 1992 में तकलाकोट (पुरंग) मंडी के जरिए व्यापार फिर शुरू हुआ. साल 2019 में कोरोना के दौरान व्यापार फिर बंद हो गया था. वहीं 6 साल बाद व्यापार फिर शुरू हुआ है. लेकिन चीन ने सिर्फ 20 व्यापारियों को व्यापार करने की अनुमति दी है. जिससे बाद सीमांत के व्यापारियों का गूंजी में रखा सामान खराब होने लगा है.

भारत-तिब्बत ट्रेड पास पंजीकृत व्यापारियों, उनके सहायकों, पोर्टर, कुली और म्यूल (खच्चर) चालकों को जारी किया जाता है. ट्रेड पास के लिए आवेदक का नाम सीमा व्यापार या पंजीकृत व्यापारी सूची में होना आवश्यक है. जिसके बाद आवेदन ट्रेड कार्यालय या जिला प्रशासन के पास जमा किया जाता है.

ट्रेड पास के आवेदन मिलने पर एसआईबी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन ब्रांच) व अन्य सुरक्षा और प्रशासनिक जांच होती है. सभी जांच होने के बाद ट्रेड पास दिया जाता है. ट्रेड पास के लिए पहचान पत्र, स्थानीय निवासी या व्यापारी प्रमाण, व्यापार पंजीकरण दस्तावेज, फोटो और सुरक्षा स्वीकृति से जुड़े रिकॉर्ड की जरूरत पड़ सकती है. उसके बाद ही व्यापार के पास बनाए जाते हैं.