मसूरी। उप जिला चिकित्सालय लंढौर में इन दिनों रोगियों की भारी भीड़ देखी जा रही है। लेकिन वहीं कुछ लोग इसे रैफर सेंटर बता कर अस्पताल के चिकित्सकों व कर्मचारियों का मनोबल गिराने का कार्य कर रहे हैं जबकि वे पूरे मनोयोग से कार्य कर रहे हैं।
इस संबंध में उप जिला चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. खजान सिंह चौहान ने अस्पताल को केवल रैफर सेंटर बताए जाने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष में अस्पताल की ओपीडी में लगभग 84 हजार मरीजों का उपचार किया गया, जबकि करीब 20 हजार इमरजेंसी मामलों को संभाला गया। इस प्रकार एक साल में एक लाख से अधिक मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं दी गईं। डॉ. चौहान के अनुसार अस्पताल के रिकॉर्ड में केवल 0.3 प्रतिशत रोगियों को रैफर किया गया है जिनका उपचार किसी बडे अस्पताल में होना जरूरी था। जिससे स्पष्ट है कि अधिकांश मरीजों का उपचार स्थानीय स्तर पर अस्पताल में ही किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और प्रसव जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं भी अस्पताल में नियमित रूप से उपलब्ध हैं। वहीं कई लोगों के माइनर आपरेशन किए गये है। उन्होंने कहा कि बिना तथ्यों के अस्पताल को रैफर सेंटर बताने से सरकार की छवि प्रभावित होती है और यहां कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों का मनोबल भी गिरता है। हालांकि उन्होंने स्टाफ की कमी स्वीकार करते हुए बताया कि 12 वार्ड बॉय के सापेक्ष वर्तमान में केवल 2 कर्मचारी कार्यरत हैं, लेकिन रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है, पत्राचार किया जा रहा है वहीं आरोग्य पोर्टल के माध्यम से फार्म भरे जा रहे हैं। जिससे लगता है कि दो से तीन माह में स्टाफ की कमी पूरी हो जायेगी। सीएमएस ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक अस्पताल की अपनी निर्धारित कार्यक्षमता और सीमाएं होती हैं। गंभीर हृदयाघात, न्यूरोसर्जरी या सिर की जटिल चोट जैसे मामलों में प्राथमिक उपचार देकर मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर किया जाता है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में चिकित्सकों की पर्याप्त सेवाएं उपलब्ध हैं और अधिकांश मरीजों का सफलतापूर्वक उपचार यहीं किया जा रहा है
