किडनैप करके फिरौती मांगने के बाद बच्चे की हत्या मामले में HC में सुनवाई, अभियुक्त को मिली जमानत

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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बच्चे के किडनैप के बाद हत्या मामले में सुनवाई की. विचाराधीन रहने तक अभियुक्त को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए.

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रुद्रपुर में साल 2012 में 11 वर्षीय बच्चे का किडनैप करके परिजनों से फिरौती मांगने के बाद उसे मौत की घाट उतारने के आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई की. मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ती रविन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने उसके खिलाफ कोई ठोस सबूतों न होने के कारण याचिका के विचाराधीन रहने तक अभियुक्त जगपाल को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं.

मामले के अनुसार जिला एवं सत्र न्यायाधीश रुद्रपुर ने संदीप शर्मा और जगपाल को 13 अगस्त 2015 को 11 वर्षीय बच्चे का अपहरण करने उसके बाद परिजनों से फिरौती मांगने फिर उसकी हत्या करने के जुर्म में आईपीसी की धारा 302, 364 अ के तहत आजीवन कारावास की सजा के साथ साथ 50-50 हजार रुपये का जुर्माने से दंडित किया था और धारा 201 के तहत 10-10 हजार का जुर्माना और तीन साल की सजा सुनवाई थी. बीते दिन इस मामले में जगपाल के द्वारा जमानत के लिए प्रार्थनापत्र पेश किया गया. जमानत प्रार्थनापत्र में उनके द्वारा कहा गया कि इस मामले के सह अभियुक्त संदीप शर्मा की जमानत आठ अगस्त 2024 को हो चुकी है.

उसी के आधार पर उन्हें भी जमानत पर रिहा किया जाए. उनके खिलाफ सीडीआर की कॉल डिटेल के अलावा कोई ठोस सबूत नहीं है. वह 13 साल से जेल में बंद है. मृत बच्चे का डीएनए उसके माता पिता से मेल नहीं खाता है. सरकार की तरफ से जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध करते हुए कहा कि अभियुक्तों ने रुद्रपुर से 27 जुलाई 2012 को 11 वर्षीय बच्चे का अपहरण किया गया. परिजनों से फिरौती मांगी और बाद में उसकी हत्या मेरठ में कर दी. पुलिस ने मेरठ से उसका शव बरामद किया. घटना के ठीक 24 दिन बाद बच्चे की स्कूल की ड्रेस रुद्रपुर बस स्टैंड के पास मिली. बच्चा 27 जुलाई 2012 को गयाब हुआ था, 29 जुलाई को परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी. इसलिए सजा को बरकरार रखने के लिए पेश की गई सीडीआर की कॉल डिटेल ही काफी है. इसलिए इनकी जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त किया जाए.

इस मामले में पर भी हुई सुनवाई: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दहेज के लिए उत्तराखंड उच्च न्यायलय के अधिवक्ता के द्वारा पत्नी की हत्या करने के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा काट रहे के मामले पर सुनवाई की. मामले की सुनवाई के बाद वरिष्ठ न्यायमूर्ती मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने उन्हें कोई अंतरिम राहत न देते हुए मामले की सुनवाई के लिए दूसरी पीठ को भेज दिया. अब इस मामले की सुनवाई दूसरी पीठ करेगी.

अभियुक्त मनीष अरोड़ा वर्ष 2017 से अपनी पत्नी की हत्या करने के आरोप में जेल में बंद है. नैनीताल के जिला सत्र न्यायाधीश ने उसे वर्ष 2019 में आजीवन कारावास की सजा सुनवाई थी. तब से आरोपी अधिवक्ता जेल में आजीवन की सजा भुगत रहा है. उन पर यह भी आरोप है कि जब मृतक को बीड़ी पांडे हॉस्पिटल में लाया गया था तो उनके द्वारा बिना पोस्टमार्टम कराए उसके शव को नैनीताल से हरिद्वार ले जाया गया. जबकि यह पूरा पुलिस केस था.

उसकी मौत प्राकृतिक तरीके से न होकर अप्राकृतिक तरीके से हुई थी. हॉस्पिटल से ले जाते वक्त उनके द्वारा डिस्चार्ज स्लिप तक नहीं ली गई. जबरदस्ती शव को हॉस्पिटल से उठाया गया. आरोपी की तरफ से कहा गया कि वे 2019 से जेल में बंद है. अभी तक उन्हें अग्रिम जमानत तक नहीं मिली है. उनके बूढ़े माता पिता हैं. कोर्ट ने इसपर कोई राहत न देते हुए मामले की सुनवाई के लिए दूसरी पीठ को भेज दिया है.