दूधली में समायरा पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट कैंपस परिसर का उद्घाटन, 

उत्तराखंड देहरादून/मसूरी

मसूरी। दूधली स्थित सीडर ब्रीज विलास के सहयोग से नये परिसर में समायरा पॉलिसी रिसर्च इंस्टीटयूट कैपस का उदघाटन मुख्य अतिथि सांसद राज्यसभा नरेश बसल ने दीप प्रत्वलित कर व रीबन काट कर किया। इस अवसर पर नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों, जनप्रतिनिधियों, छात्रों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।

हिमालयी वादियों के बीच स्थित सीडर ब्रीज विला के शांत वातावरण में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने कहा कि संस्थान ने जिस उददेश्य को लेकर इसकी स्थापना की वह समाज हित में होगा, इससे समाज में परिर्वन लायेगा। उन्होंने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसी संकल्प के साथ भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का प्रयास कर रहे है। जिसमें इस प्रकार के प्रयोग जरूरी है। जो सोच संस्थान की है वहीं सोच भारत सरकार की जीराम जी योजना की है। संस्थान के अध्यक्ष विशाल पॉल ने स्वागत संबोधन में कहा कि समायरा पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट लोकतांत्रिक विमर्श, जननीति अनुसंधान और जमीनी स्तर के शासन को मजबूत करने के उद्देश्य से कार्य करेगा। संस्थान ने अपने विभिन्न ग्रामीण विकास एवं जननीति संबंधी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि हरियाणा के जींद जिले की ग्राम पंचायत शामलो कला को गोद लेकर वहां एआई आधारित ग्रामीण नवाचार प्रयोगशाला स्थापित करने तथा कचरा प्रबंधन एवं पर्यावरणीय चुनौतियों पर कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा उत्तराखंड के नैनीताल जिले में पर्यावरण अनुकूल मिट्टी के घरों के निर्माण और हिमालयी क्षेत्रों के अनुरूप सतत विकास मॉडल को बढ़ावा देने की दिशा में भी संस्थान कार्य कर रहा है। कार्यक्रम के दौरान के सहयोग से लोकनायक जयप्रकाश नारायण की स्मृति में लोक नायक रूरल फेलोशिप शुरू करने की घोषणा की गई। इस फेलोशिप का उद्देश्य युवाओं को ग्रामीण शासन, जमीनी लोकतंत्र और सामुदायिक विकास से जोड़ना है। संस्थान ने जनमत द पीपल्स वॉइस मंच के माध्यम से देशभर में जननीति और सुशासन से जुड़े विषयों पर सार्थक संवाद को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। एसपीआरआई ने भविष्य में जननीति अनुसंधान का विस्तार, गवर्नेंस एवं पॉलिसी स्टडीज में प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम तथा पंचायती राज, विकेंद्रीकरण और सहकारिता विकास के क्षेत्रों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की योजनाओं की जानकारी दी। इस दौरान संस्थान ने श्रीपाद सुब्राव तालमाकी कोऑपरेटिव रिसर्च डिपार्टमेंट की स्थापना की भी घोषणा की। यह विभाग भारत में सहकारिता आंदोलन के जनक माने जाने वाले के नाम पर स्थापित किया गया है, जो सहकारी संस्थाओं से जुड़े शोध, दस्तावेजीकरण, नीति निर्माण और संस्थागत सहयोग पर कार्य करेगा। अपने संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि देश के समग्र विकास के लिए शहरी निकायों, ग्राम पंचायतों, नगरपालिकाओं और सहकारी संस्थाओं की भूमिका को मजबूत करना आवश्यक है तथा जननीति को महानगरों और अकादमिक दायरों से निकलकर जमीनी वास्तविकताओं से जुड़ना होगा। इस मौके पर पूर्व निदेशक साउंसिल फॉर सोशल डेवलपमेंट शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार डा. नित्यानंद ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। मेधा, विशाल पॉल, कमलकांत पाठक, विजय, पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला डा. अल्का भिंडे, पूर्व आईजी मनोरंजन त्रिपाठी, सभासद जसबीर कौर, रूप सिंह कठैत सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन सुनीता कुडले ने धन्यवाद ज्ञापन देकर किया।