छावनी निवासियों ने लंढौर नाम बदलने के प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज की।

उत्तराखंड देहरादून/मसूरी

मसूरी। छावनी परिषद के निवासियों ने पूर्व छावनी परिषद उपाध्यक्ष बादल प्रकाश के नेतृत्व में छावनी परिषद कार्यालय जाकर लंढौर छावनी परिषद का नाम बदल कर रामगीर रखने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है व छावनी प्रशासन से मांग की है कि ख्याति प्राप्त नाम को न बदला जाय।
छावनी परिषद के निवासियों ने इस संबंध में पत्र देकर आपत्ति दर्ज करायी है जिसमें कहा गया है कि लंढौर नाम लोगों की जड़ो से जुडा है, अगर इसे बदला गया तो इसका समृद्ध इतिहास समाप्त हो जायेगा। पत्र की जानकारी देते हुए पूर्व छावनी परिषद उपाध्यक्ष बादल प्रकाश ने कहा कि लंढौर नाम पिछले दो सौ सालों से देश ही नही विदेशों में भी जाना जाता है, इसका अपना इतिहास रहा है व बच्चा बच्चा इस नाम को जानता है। छावनी परिषद लंढौर के इतिहास, इसकी संस्कृति को न छेड़ा जाय। यह नाम मसूरी के पर्यटन व्यवसाय के लिए भी जरूरी है, अगर इसका नाम बदला गया तो यहां की आर्थिकी पर इसका बुरा प्रभाव पडेगा। मसूरी के इतिहासकारां रस्किन बॉड, अनमोल जैन, गणेश सैली, जय प्रकाश उत्तराखंडी ने अपनी पुस्तकों में इसका उल्लेख किया है व इसके इतिहास के बारे में विस्तार से लिखा है। अगर इसका नाम बदला गया तो उसका विपरीत प्रभाव पडेगा व जनता को आंदोलन के लिए बाध्य होना होगा।