मसूरी वन प्रभाग कार्यालय प्रांगण में जौनपुर विकासखंड के जनप्रतिनिधियों ने धरना दिया। 

उत्तराखंड देहरादून/मसूरी

मसूरी। मसूरी वन प्रभाग को समाप्त कर जौनपुर क्षेत्र को नरेंद्र नगर वन प्रभाग व मसूरी को देहरादून वन प्रभाग में शामिल किए जाने के प्रस्ताव का जौनपुर की जनता लगातार कड़ा विरोध कर रही है। इसी के तहत जौनपुर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने मसूरी वन प्रभाग कार्यालय प्रांगण में एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया व चेतावनी दी कि यदि मसूरी वन प्रभाग को समाप्त किया गया तो बड़ा आंदोलन किया जायेगा।
जौनपुर विकासखंड प्रधानसंघ के अध्यक्ष प्रदीप कवि के नेतृत्व में बड़ी संख्या में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने मसूरी वन प्रभाग कार्यालय प्रांगण में धरना दिया व मांग की कि मसूरी वन प्रभाग को समाप्त न किया जाय व जौनपुर को मसूरी वन प्रभाग में रहने दिया जाय। इस मौके पर प्रधान संघ के अध्यक्ष प्रदीप कवि ने कहा कि जौनपुर विकास खंड के जनप्रतिनिधि व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मसूरी वन प्रभाग में धरना दिया व कहा कि जौनपुर विकासखंड की चार रेंजों को पुनर्गठन के तहत इसे मुनी की रेती वन प्रभाग से जोड़ा जा रहा है जबकि यह क्षेत्र मसूरी से जुडा है व मसूरी क्षेत्र के लिए सुगम है मसूरी क्षेत्र से पचास से साठ किमी है जबकि मुनी की रेती करीब दो सौ किमी होगा जिसका विरोध किया जायेगा। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण भी इसी लिए किया गया था कि छोटी प्रशासनिक ईकाइयां होगी जिससे जनता को लाभ मिलेगा लेकिन यहां तो इसे समाप्त किया जा रहा है अगर इस पर विचार नहीं किया गया तो बडा आदोंलन करने को बाध्य होना पडेगा। इस मौके पर पूर्व पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल ने कहा कि राज्य का निर्माण भी इसी लिए किया गया था कि जनता को सुविधाएं मिले, अगर पुनर्गठन करना है, तो अन्य क्षेत्रों का करें, नरेंद्र नगर जाना किसी के लिए भी उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे गहरा राज है ऐसा लगता है कि इसे हटाने के बाद इस संपत्ति को खुर्दबुर्द करने का प्रयास लग रहा है। उन्होंने कहा कि वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि जब तक वह मंत्री है वह इस प्रस्ताव पर साइन नहीं करेंगे। जबकि चुनाव आने वाले है जो इसका खामियाजा भुगतना पडे़गा। इस मौके पर शहर कांग्रेस अध्यक्ष अमित गुप्ता ने कहा कि जो व्यवस्था पूर्व से चली आ रही है इसे यथावत रखा जाय। मसूरी प्रभाग बडा है जिसमें सभी रेंज के लोगों के लिए सुगम है, जब अगर इसे हटाया गया तो लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। मसूरी में डीएफओ का बैठन जरूरी है व उन्हें यथावत बैठना चाहिए। जाखन के पार्षद सुमेंद्र बोहरा ने कहा कि सरकार पहाड़ों के विभागों को मैदानी क्षेत्र में ले जाना उचित नहीं है यह जनता के साथ न्याय नहीं है इसके लिए पहले जनता से राय सुमारी करनी चाहिए थी यह जनता के अधिकारों का हनन है। ऐसे मोके पर मंत्री गणेश जोशी को इस लडाई में खडा होना चाहिए था व इस मुददे का उठाना चाहिए। रायपुर को देहरादून में मिलाना जायज है लेकिन जौनपुर को मिलाना ठीक नहीं है। इस अन्याय को बर्दास्त नहीं किया जायेगा। ग्राम प्रधान श्वेता राणा ने कहा कि मसूरी वन प्रभाग सबसे पुराना है, प्रधान होने के नाते छोटी समस्याओं का समाधान मसूरी में हो जाता था अगर नरेंद्र नगर विभाग जायेगा तो दो सौ किमी पडेगा जिसमें दो दिन लगेंगे, महिला प्रतिनिधि होने के नाते घर के काम के साथ जनता के काम करने होते है ऐसे में नरेंद्र नगर जाना संभव नहीं है जबकि मसूरी में एक दिन में ही कार्य हो जाता था। अगर इस पर शीघ्र जनहित में निर्णय नहीं लिया गया तो महिलाए भी आंदोलन में प्रतिभाग करेंगी। वहीं दूसरी ओर भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री आर्यन देव उनियाल ने कहा कि पूरे प्रदेश में वन विभाग का पुनर्गठन हो रहा है, लेकिन मसूरी वन प्रभाग के लिए यह संभव नहीं है मसूरी व आसपास के क्षेत्र के लोगों के लिए मसूरी उचित है नरेंद्र नगर बहुत दूर पडेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार संवेदनशील है, जनता ने यह बात उठायी व जनभावना का ध्यान रख निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि मंत्री गणेश जोशी भी संवेदनशील मंत्री है उनके पास जायेगे तो वह जनहित की बात करेंगे व निर्णय लेगें, उन्होंने कहा कि वह भी जनहित में ज्ञापन देंगे व प्रदेश के मुख्य सचिव से मिलेगे व अपनी बात रखेगें। मसूरी का होने के नाते हमें भी इस बात से पीड़ा है। धरना देने वालों में पूर्व पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल, मेघ सिंह कंडारी, अमित गुप्ता, सुमेंद्र वोहरा, सुरेंद्र रावत, अध्यक्ष प्रधान संघ जौनपुर प्रदीप कवि, ग्राम प्रधान श्वेता राणा, अंशुल पंवार, बिजला देवी, राखी रावत, मुकेश पंवार, सुनील रौछेला, सुरेद्र रावत, रोशन वर्मा, क्षेत्र पंचायत सदस्य सुमारी अग्रवाल, नवीन शाह, जगत लाल डोगरा, कमल रावत, रितेश रावत, टीकम चौहान आदि थे।