एससआईआर से जनता में भय व्याप्त, चुनाव आयोग कागजी कार्रवाई का सरलीकरण करे।

उत्तराखण्ड देहरादून/मसूरी

 

मसूरी। महिला कांग्रेस की अध्यक्ष एवं पालिका सभासद जसबीर कौर ने कहा कि एसआईआर से लोगों में भय व्याप्त हो रहा है कि उनका नाम देश की मतदाता सूची से कट जायेगा, उनकी सभी सुविधाएं आयुष्मान कार्ड, पहचान पत्र, राशन कार्ड आदि समाप्त हो जायेगा। एसआईआर के तहत लोगों को विभिन्न कागजी कार्रवाई के लिए दबाव बनाया जा रहा है व ऐसे कारण बताये जा रहे है जिसका कोई लेना देना नहीं है।
उन्होंने कहा कि इन दिनों नगर पालिका टाउन हाल में एसआईआर में जिन लोगों को नोटिस दिया है उसकी जांच चल रही है। इसमें लोगों में भय का माहौल बन रहा है कि अगर पेपर पूरे नहीं हुए तो हमारा राज्य व देश से नाम कट जोगा व उन्हंे सभी सरकारी सुविधाओं से हाथ धोना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जो एसआईआर का कार्य कर रहे है उन्हें अधिकारियों व बीएलओ को प्रशिक्षण देना चाहिए था कि जो समस्यायें आ रही है उसका समाधान इस तरह से होगा। पहले मैपिंग करी व बीएलओ ने मैपिंग की जो आधी अधूरी की गयी कहीं बीएलओ नहीं गये। मैंपिग के बाद अब नोटिस भेजा जा रहा है जिसमें कारण लिखा नहीं है। जब कारण नहीं है तो जनता नोटिस का उत्तर कैसे दे। वहीं दादा दादी, नाना नानी की उम्र में बहुत अंतर है, इसका सरकार के पास रिकार्ड किसके पास है, जनता बीएलओ के पास जाती है तो कभी कहते है आधार कार्ड लगाओ, कभी कहते हैं पास पोर्ट लगाओ कभी कहते है पेनकार्ड लगाओ, ऐसे में समाधान कैसे होगा उनको प्रशिक्षण ही नहीं दिया गया। दिनभर मतदाता पत्रों की जांच के बाद बीएलओं को नोटिस भेजने के लिए भेज दिया जाता है और वे बारिश में घर घर जाकर देर रात्रि तक नोटिस बांटने में लगे हैं। बंगाल में पासपोर्ट लागू नहीं है उत्तराखंड में पासपोर्ट लगाया जा रहा है एक देश में अलग अलग कानून है, उन्हांेने निर्वाचन आयोग से मांग की कि सारी वोटरलिस्ट को आधार से जोडा जाय यह प्रक्रिया पूरे देश में लागू की जाय। भारत में बाहरी देशों के लोग रहते है उनके नाम काट दें लेकिन जो देश के वासी है उन्हें क्यों डरा रहे हैं, जनता को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें उल्टे सीधे नोटिस भेजे जा रहे है, जब प्रत्येक वर्ष वोटर आई बनायी जाती है तो उसमें नाम गलत हो जाता है इसकी जिम्मेदारी किसकी है, कहीं नाम गलत कहीं पिता का नाम व माता का नाम गलत कहीं उम्र का अंतर इन सबका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है उन्होंने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि जनता को डराने के बजाय इस प्रक्रिया को सरल बनायें, व बिना मतलब के नोटिस भेजना बंद कीजिए। इस मौके पर तहमीना खान, रूबीना अंजुम, रिया, भगवती प्रसाद कुकरेती, महिमानंद आदि मौजद रहे।