उच्च न्यायालय का जार्ज एवेरेस्ट पर निर्णय सत्य, न्याय और उत्तराखंड पर्यटन की गरिमा की विजय। 

उत्तराखंड देहरादून/मसूरी

मसूरी। उच्च न्यायालय, नैनीताल ने याचिका का निस्तारण करते हुए  राजस एयरो स्पोर्टस एंड एडवेंचर प्रालि, को बड़ी राहत दी है। न्यायालय ने परीक्षण के बाद परियोजना की वैद्यता, उसकी मंशा, व संचालन प्रक्रिया पर किसी भी प्रकार की प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की व याचिका को निरस्त कर दिया गया।
राजस एयरो स्पोर्टस एंड एडवेंचर के प्रवक्ता एजीएम जार्ज पार्क स्टेट केशव चंद ने बताया कि पिछले कुछ समय से जार्ज एवरेस्ट परियोजना को लेकर कुछ असामाजिक तत्वों ने निरंतर प्रयास किए जिनका उददेश्य इस महत्वकांक्षी पर्यटन परियोजना, उत्तराखंड पर्यटन विभाग तथा राजस कंपनी की छवि को धूमिल करना था। वहीं कंपनी के प्रयासों के तहत भ्रामक कथन, अधूरी जानकारी, और गलत निष्कर्षो को सार्वजनिक मंचों पर प्रसारित किया गया। जिस पर उच्च न्यायालय ने सभी विषयों का न्यायिक परीक्षण किया व उनके आरोप तथ्य, एंव कानून की कसौटी पर टिक नहीं पाए। न्यायालय ने परियोजना की वैद्यता, उसकी मंशा, व संचालन प्रक्रिया पर किसी भी प्रकार की प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की व याचिका को निरस्त कर दिया गया। प्रतिवादियों ने भ्रम फैलाया कि सार्वजनिक सड़क पर शुल्क व्यवस्था की गयी है, न्यायालय ने पाया कि जार्ज एवरेस्ट क्षेत्र में कभी भी सार्वजनिक सडक पर कोई टोल नहीं लगाया गया।, जो शुल्क लिया जाता रहा वह जार्ज एवरेस्ट पार्क स्टेट में प्रवेश हेतु निर्धारित वैध एंट्री फीस थी। जो एक पृथक अनुबंध सम्मत और नियमों के अनुरूप व्यवस्था है। न्यायालय ने यहभी स्पष्ट किया कि पार्क स्टेट में प्रवेश शुल्क लेने का अधिकार पूर्णतः यथावत है, इस पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगायी गयी। वहीं परियोजना संचालन पर रोक, अवैध गतिविधियों अथवा नियमों के उलंघन के आरोप न्यायिक जांच में प्रमाणित नहीं हो सके व उन पर कोई प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि राजस कंपनी एंव उत्तराखंड पर्यटन विभाग इस विश्वास के साथ आगे बढ रहा है। जार्ज एवरेस्ट केवल पर्यटक स्थल नहीं बल्कि उत्तराखंड की अस्मिता, स्थानीय रोजगार और राज्य के पर्यटन भविष्य का प्रतीक है। आखिर सत्य की जीत हुई। यह उत्तराखंड का एक ही प्रतिष्ठित स्टार्ट अप है जिसकी स्थापना उत्तराखंड के एसी मनीष सैनी एवं कैप्टन मयंक सैनी ने की। इसका उददेश्य उत्तराखंड के लोगों के साथ आगे बढने का संकल्प है। यह हिमालय का एक विश्वस्तरीय पर्यटक स्थल बने, गुणवत्ता में आल्पस क्षेत्र के अंतर्राष्ट्रीय स्थलों स्विटजर लैंड के समकक्ष खडा हो सके। यह उत्तराख्ांड के पर्यटन भविष्य की आधार शिला है।
बाक्स- वहीं दूसरी ओर विरोधी पक्ष ने भी उच्च न्यायालय के आदेश पर खुशी जताई व नारेबाजी के साथ मिष्ठान वितरित किया गया। जार्ज एवरेस्ट गेट के समीप प्रकाश राणा, भगत सिंह कठैत, जगपाल गुसांई सहित अन्य लोगों ने उच्च न्यायालय के निर्णय को जनता की जीत बताया व कहा कि अब जार्ज एवरेस्ट जाने वाला मार्ग सार्वजनिक हो गया है व अब सड़क पर जाने के लिए कोई अवैध वसूली नहीं की जा सकेगी न ही किसी स्थानीय लोगों व पर्यटकों को रोका जायेगा। उच्च न्यायालय ने स्पष्ठ आदेश दिया है कि रोड परमानेंट खुली रहेगी कोई शुल्क नहीं ले सकते यह स्थानीय लोगों व लोकतंत्र की जीत है, केवल म्यूजियम में जाने का शुल्क लिया जा सकेगा।