गैरसैंण, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य समस्याएं सब गायब! सिर्फ चुनावी राजनीति में उलझा स्वाभिमान मोर्चा. लगने लगे अवसरवादी राजनीति के आरोप, प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुद को बताया “शुद्ध क्षेत्रीय दल”..
देहरादून: गैरसैंण, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर चुप्पी और चुनावी राजनीति पर जोर ने स्वाभिमान मोर्चा की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। देहरादून में आयोजित स्वाभिमान मोर्चा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेताओं के जवाबों से उनकी रणनीति और सोच पर चर्चा शुरू हो गई है।
Swabhiman Morcha Flag Unveil Press Conference
जहां एक ओर स्वाभिमान मोर्चा ने खुद को “शुद्ध क्षेत्रीय दल” बताया, वहीं दूसरी ओर पहाड़ के असल मुद्दों से दूरी और केवल चुनावी राजनीति पर फोकस ने उन्हें आलोचना के घेरे में ला दिया। सोशल मीडिया पर सवाल पूछने वाले आम नागरिकों को “ट्रोल आर्मी” बताने से विवाद और गहरा गया।
UKD पर निशाना, लेकिन खुद पर उठे सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्वाभिमान मोर्चा के नेताओं ने उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) पर तीखे हमले किए। हालांकि, इस दौरान उनकी अपनी नीतियों और विजन की कमी उजागर होती रही। इससे दोनों दलों के बीच सोच का अंतर भी सामने आया, जहां UKD लंबे समय से क्षेत्रीय मुद्दों पर मुखर रहा है, स्वाभिमान मोर्चा का मकसद चीख-चिल्लाहट और हंगामा खड़ा करना प्रतीत हो रहा है।
सोशल मीडिया पर आलोचना को बताया “ट्रोल आर्मी”
स्वाभिमान मोर्चा के नेताओं ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाने वाले आम नागरिकों को “ट्रोल आर्मी” करार दिया। इस बयान के बाद जनता में नाराजगी और बढ़ गई, क्योंकि इसे आलोचना से बचने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ तौर पर देखा गया कि पार्टी का ध्यान केवल आगामी चुनावों में जोड़-तोड़ की रणनीति पर था। जनता के मुद्दों से ज्यादा राजनीतिक समीकरण और चुनावी गणित पर चर्चा होती रही।
“अवसरवादी राजनीति” के आरोप
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्वाभिमान मोर्चा की रणनीति “अवसरवादी राजनीति” की ओर इशारा करती है। यह भी कहा जा रहा है कि स्वाभिमान मोर्चा के लिए उत्तराखंड में सरकार बनाना बहुत दूर की कौड़ी है लेकिन आगामी चुनावों में यह दल मात्र UKD के वोट काटने में भूमिका निभा सकता है और संभावित रूप से राष्ट्रीय दलों की “B-टीम” बन सकता है।
उत्तराखंड में चुनावी माहौल धीरे-धीरे गर्म हो रहा है, लेकिन स्वाभिमान मोर्चा की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने उनके इरादों और तैयारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता इन दावों और हकीकत के बीच कैसी प्रतिक्रिया देती है।
